सही नहीं है

जो सही है वो सही है,
जो नहीं है वो नहीं है|

नाचूं तेरे डमरू पे तो मेरी वाह-वाही है,
रत्ती भर जो आह करूँ तो मेरी शामत आई है|

उबली उबली अंगारों सी,
सुलगे उझड़े अरमानों सी,
बेबस फिर भी आस पे ज़िन्दा,
सुन ये आँखें क्या कहें!

बूँद बूँद कर बहती जाती,
ज़ुल्म बेपरवाह सहती जाती,
पिंजरे की चिड़िया के जैसी
फिर ज़िन्दगी क्या रहे!

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बर्दाश्त

उनके वार से हुए घाव पे जब हमने दर्द ना जताया
तो उस बात का दर्द उन्हें इतना हुआ कि हमारे घाव ही भर गए।
हमारे बर्दाश्त के नुस्ख़े गज़ब काम कर गए।

चाहते तो हम भी चीख़ सकते थे,
भीड़ में अलग दिख सकते थे,
पर हमारे जीतने के तरीके कुछ और हैं।
वो चाहते तो हम से सीख सकते थे।
पर जीत का हुनर हम से सीखने की बात से
वो ख़ामख़ा ही डर गए।
हमारे बर्दाश्त के नुस्खे गज़ब काम कर गए।

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