रोशन अंधेरें

Roshan Andhere

धूप और छांव की,
दरिया और नाँव की,
रिश्तेदारियां आज
बस ये कहें,
खिलती धूप किरनें
बाद में हैं जिसके,
अंधेरें बा-अदब
वो रोशन रहें |

Continue reading “रोशन अंधेरें”

Follow

Follow!

%d bloggers like this: