Video कविता हिंदी

सही नहीं है

जो सही है वो सही है,
जो नहीं है वो नहीं है|

नाचूं तेरे डमरू पे तो मेरी वाह-वाही है,
रत्ती भर जो आह करूँ तो मेरी शामत आई है|

उबली उबली अंगारों सी,
सुलगे उझड़े अरमानों सी,
बेबस फिर भी आस पे ज़िन्दा,
सुन ये आँखें क्या कहें!

बूँद बूँद कर बहती जाती,
ज़ुल्म बेपरवाह सहती जाती,
पिंजरे की चिड़िया के जैसी
फिर ज़िन्दगी क्या रहे!

तू भी जाने क्या हकीकत
क्या तेरा फ़साना है|
क्या तूने उझाड़ा है
और क्या मुझको बसाना है|

अब भी वक़्त है, मौका भी,
रब ने तुझको टोका भी,
दिल पे रख के हाथ मान ले,
ज़हन ने तुझको रोका भी|
सब्र का बांध अब टूट रहा है,
नदियाँ हैं उफ़ानों पर|
संभल संभल कर नोच तू मुझको,
मैं तिनका तूफ़ानों पर|

खैर, मनाना खैर तू तेरी,
जो बांध फट जाएगा|
बरसों से जो भरा पडा है,
वो सैलाब आएगा|

बात अधूरी छोड़ रहा हूँ
दिल तेरा जताएगा|
मेरी ज्वाला की गर्मी से
अब तू पिघल ही जाएगा|

ज़ुबान हूँ मैं उन सब मूक की
जिनकी बात कही है|
जो सही है वो सही है,
जो नहीं है वो नहीं है|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow

Follow!

%d bloggers like this: