Video कविता हिंदी

बर्दाश्त

उनके वार से हुए घाव पे जब हमने दर्द ना जताया
तो उस बात का दर्द उन्हें इतना हुआ कि हमारे घाव ही भर गए।
हमारे बर्दाश्त के नुस्ख़े गज़ब काम कर गए।

चाहते तो हम भी चीख़ सकते थे,
भीड़ में अलग दिख सकते थे,
पर हमारे जीतने के तरीके कुछ और हैं।
वो चाहते तो हम से सीख सकते थे।
पर जीत का हुनर हम से सीखने की बात से
वो ख़ामख़ा ही डर गए।
हमारे बर्दाश्त के नुस्खे गज़ब काम कर गए।

हमने उन्हें मौका भी दिया था हमें ढेर करने का।
ख़ुद बिल्ली बन कर उन्हें शेर करने का।
पर कहने से कोई शेर नहीं होते।
पत्तों का महल नहीं हम। ऐसे ही ढेर नहीं होते।
घाव ताकत हैं हमारी, हमें सीखाते हैं।
आंखों के बस के बाहर का हमें दिखाते हैं।
देख कर ज़िद्दी मुस्कान हमारी शायद वो डर गए।
तभी हमें मारने के उनके होंसले मुकर गए।
हमारे बर्दाश्त के नुस्खे गज़ब काम कर गए।

हमें पथ्थर समझा उन्होंने, सोचा, हम डूब जाएंगे।
हम बोझ नहीं दरिया पर, तिनका हैं हम, तैर जाएंगे।
उनकी करतूतों से उनके घड़े पाप के भर गए।
श्वेत हमारे हल्के फुल्के, उनके श्याम पे भारी पड़ गए।
हमारे बर्दाश्त के नुस्खे गज़ब काम कर गए।

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