कविता हिंदी

रोशन अंधेरें

Roshan Andhere

धूप और छांव की,
दरिया और नाँव की,
रिश्तेदारियां आज
बस ये कहें,
खिलती धूप किरनें
बाद में हैं जिसके,
अंधेरें बा-अदब
वो रोशन रहें |

काले में जितना सा
श्वेत है बसा हुआ,
है सफेद में उतना ही
श्याम भी फंसा हुआ |
मिल जाये दोनों जो
बीच रास्ते कहीं
खो देंगे पहचानें
अपनी तभी वहीं |
एक है, तो दूसरे का
परचम ऊंचा रहे |
चीर के जो निकले तो
तीर बन के निकले तू,
अंधेरें बा-अदब
वो रोशन रहें |

Photo Credit: jplenio

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